शनि जयंती 2026 पर बना महासंयोग, 30 वर्षों बाद आया ऐसा अद्भुत अवसर
वर्ल्ड मीडिया न्यूज़
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वर्ष 2026 की शनि जयंती अत्यंत दुर्लभ और विशेष मानी जा रही है। इस बार ज्येष्ठ अमावस्या, शनिवार और शनि जयंती का अद्भुत महासंयोग 16 मई 2026 को बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र में जब अमावस्या तिथि शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे शनैश्चरी अमावस्या कहा जाता है, और जब उसी दिन शनि जयंती भी हो, तब उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि देशभर के श्रद्धालु और ज्योतिषाचार्य इस दिन को अत्यंत प्रभावशाली और आध्यात्मिक दृष्टि से दुर्लभ मान रहे हैं।
आखिर 30 वर्षों बाद ऐसा दुर्लभ महासंयोग क्यों बना है
फ्यूचर वर्ल्ड एस्ट्रोलॉजी इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष, ज्योतिषाचार्य एवं लेखक शुभोधुती कुमार मंडल ने जानकारी देते हुए बताया कि शनि जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है, लेकिन हर बार शनिवार के दिन यह संयोग नहीं बनता। वर्ष 2026 में अमावस्या तिथि का मुख्य प्रभाव शनिवार 16 मई को पड़ रहा है, जिसके कारण शनि जयंती और शनैश्चरी अमावस्या का महासंयोग बन रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार ऐसा प्रभावशाली योग लगभग 30 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद विशेष रूप से बन रहा है, इसलिए इसे अत्यंत दुर्लभ माना जा रहा है।
उन्होंने बताया कि शनि देव न्याय, कर्म और अनुशासन के देवता हैं। जब उनकी जयंती शनिवार के दिन आती है, तब शनि ऊर्जा का प्रभाव अधिक सक्रिय माना जाता है। इस दिन किए गए पूजा-पाठ, मंत्र जाप, दान-पुण्य और सेवा कार्य का फल सामान्य दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक प्राप्त होने की मान्यता है। विशेषकर जिन लोगों पर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या, शनि दोष, राहु-केतु बाधा या आर्थिक संघर्ष चल रहा हो, उनके लिए यह दिन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
शनि जयंती 2026 सही तिथि एवं समय
अमावस्या तिथि प्रारंभ : 15 मई 2026, शुक्रवार रात्रि लगभग 10:48 बजे
अमावस्या तिथि समाप्त : 17 मई 2026, रविवार प्रातः लगभग 06:32 बजे
शनि जयंती एवं शनैश्चरी अमावस्या : 16 मई 2026, शनिवार
पूजा का शुभ समय
प्रातःकालीन पूजा
सुबह 4:05 बजे से 5:20 बजे तक
अभिजीत शुभ मुहूर्त
दोपहर लगभग 11:50 बजे से 12:42 बजे तक
संध्या दीपदान एवं पूजा
शाम 5:45 बजे से सूर्यास्त तक
शनि मंत्र जाप और तेल अर्पण
सूर्यास्त के बाद से रात्रि 9 बजे तक विशेष फलदायी
शनि जयंती पर कैसे करें पूजा
शनि जयंती के दिन प्रातः स्नान कर साफ और गहरे रंग के वस्त्र धारण करें। इसके बाद शनि मंदिर या पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। शनि देव को काले तिल, उड़द दाल, नीले फूल और तेल अर्पित करें। श्रद्धा से “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें। साथ ही शनि चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
इन उपायों से मिल सकती है शनि कृपा
गरीबों और मजदूरों को भोजन कराएं
काले तिल और सरसों तेल का दान करें
कौओं और काले कुत्ते को रोटी खिलाएं
पीपल वृक्ष की पूजा करें
शनि मंदिर में तेल अर्पित करें
लोहे की वस्तु और काले वस्त्र का दान करें
जरूरतमंद लोगों की सहायता करें
किन कार्यों से बचना चाहिए
इस दिन झूठ, क्रोध, अहंकार, अपमान और गलत कार्यों से दूर रहना चाहिए। किसी गरीब, बुजुर्ग, मजदूर या असहाय व्यक्ति का अपमान भूलकर भी नहीं करना चाहिए। शनि देव कर्म के आधार पर फल देते हैं, इसलिए इस दिन विशेष रूप से संयम और सेवा भाव रखना शुभ माना जाता है।
शनि जयंती का आध्यात्मिक संदेश
शनि देव केवल दंड देने वाले देव नहीं हैं, बल्कि वे मनुष्य को कर्म, धैर्य, अनुशासन और सच्चाई का मार्ग दिखाते हैं। जीवन में कठिन समय आने पर व्यक्ति को टूटना नहीं चाहिए, बल्कि अपने कर्मों को सुधारना चाहिए। शनि जयंती का यह पावन पर्व यही संदेश देता है कि सच्चाई, मेहनत और ईमानदारी के मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति अंततः सफलता अवश्य प्राप्त करता है। वर्ष 2026 का यह दुर्लभ महासंयोग श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक जागृति, ग्रह शांति और सकारात्मक परिवर्तन का विशेष अवसर माना जा रहा है।
शुभोधुती कुमार मंडल
लेखक पत्रकार

शुभोधुती कुमार मंडल, संपादक – वर्ल्ड मीडिया न्यूज़, संपादक – फ्यूचर टी.वी., समाचार पत्र, न्यूज़ पोर्टल, न्यूज़ वेबसाइट,
(वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर, राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय अवार्ड, सम्मान पत्र द्वारा सम्मानित)
कार्यालय – वर्ल्ड मीडिया न्यूज़, शिव मंदिर रोड, आवास विकास, रूद्रपुर, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड, फोन नंबर – 05944-242111, 245999, फोन फैक्स नंबर – 05944-353901
